मेरी पुस्तकें
मेरी पुस्तकों का मूल उद्देश्य समाज और राष्ट्र के सामने उपस्थित चुनौतियों पर विचार करना तथा संभावित समाधानों की दिशा में संवाद प्रारंभ करना है।
इन पुस्तकों में आध्यात्मिकता, संस्कृति, राष्ट्र-चेतना, सुरक्षा, आर्थिक विकास, कर-व्यवस्था और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
पुस्तक 1: श्रीरामचरितमानस — संक्षिप्त व्याख्या
विद्यार्थियों और युवाओं के लिए जीवन-दर्शन
यह पुस्तक श्रीरामचरितमानस के प्रमुख प्रसंगों और जीवन-मूल्यों को सरल भाषा में समझने का प्रयास है।
इस पुस्तक का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को भगवान श्रीराम के चरित्र, मर्यादा, सत्य, कर्तव्य, त्याग, नेतृत्व और पारिवारिक मूल्यों से परिचित कराना है।
प्रमुख विषय
- सत्य और मर्यादा
- कर्तव्य और अनुशासन
- माता-पिता एवं गुरु का सम्मान
- नेतृत्व और निर्णय क्षमता
- कठिन परिस्थितियों में धैर्य
- परिवार और समाज के प्रति दायित्व
पुस्तक 2: रघुराम हनुमंत गाथा
संस्कृति और राष्ट्र-चेतना का संदेश
यह पुस्तक भगवान श्रीराम और हनुमानजी के आदर्शों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सेवा, निष्ठा, साहस और राष्ट्र-चेतना का संदेश प्रस्तुत करती है।
हनुमानजी का चरित्र हमें समर्पण, शक्ति, विनम्रता, बुद्धिमत्ता और कर्तव्यपरायणता की प्रेरणा देता है।
पुस्तक का उद्देश्य
- भारतीय सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना।
- युवाओं में सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना।
- चरित्र-निर्माण को जीवन का आधार बनाना।
- भारतीय आदर्शों को आधुनिक जीवन से जोड़ना।
पुस्तक 3: गीतांश
सुरक्षित, सशक्त और अखंड भारत की संकल्पना
‘गीतांश’ के माध्यम से सुरक्षित, सशक्त, एकजुट और सांस्कृतिक रूप से जागरूक भारत की कल्पना प्रस्तुत की गई है।
यह पुस्तक राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता, देशभक्ति और भारत की अखंड सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित है।
प्रमुख विचार
- राष्ट्रीय एकता
- सामाजिक समरसता
- सांस्कृतिक गौरव
- देश के प्रति जिम्मेदारी
- सुरक्षित और सशक्त भारत
- नागरिकों में राष्ट्रभावना
पुस्तक 4: आत्मनिर्भर भारत
आर्थिक आत्मनिर्भरता और सुशासन की दिशा में विचार
‘आत्मनिर्भर भारत’
पुस्तक में भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था, कर-ईमानदारी, राजस्व-वृद्धि, स्वरोजगार, कौशल-विकास और आर्थिक विकास से जुड़े विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
इस पुस्तक का उद्देश्य भारत को आर्थिक रूप से मजबूत, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिकों वाला राष्ट्र बनाने की दिशा में विचार-विमर्श को आगे बढ़ाना है।
प्रमुख विषय
- कर-ईमानदारी
- भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था
- पारदर्शी शासन
- स्वरोजगार और उद्यमिता
- कौशल-विकास
- रोजगार के अवसर
- निर्यात और उत्पादन में वृद्धि
- जिम्मेदार नागरिकता
- आर्थिक आत्मनिर्भरता
नीति संबंधी विचार
पुस्तक में कम कर-दर, व्यापक कर-आधार, कर-चोरी की भावना में कमी, व्यापारिक पारदर्शिता और राजस्व-वृद्धि से संबंधित एक वैकल्पिक कर-व्यवस्था पर विचार प्रस्तुत किया गया है।
इन विचारों का उद्देश्य कर-व्यवस्था को नागरिकों के लिए सरल, पारदर्शी और सहज बनाना है, ताकि लोग स्वेच्छा से कर-अनुपालन करें और देश के विकास में योगदान दें।
यह पुस्तक एक वैकल्पिक नीतिगत विचार प्रस्तुत करती है। इसमें दिए गए प्रस्ताव वर्तमान सरकारी कर-व्यवस्था या आधिकारिक आर्थिक नीति का स्थान नहीं लेते।
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